हिंसा ही यदि लक्ष्य हो गया जिस मानव का
पाठ अहिंसा का क्या कभी समझ पाएगा
कर हिंसा स्वीकार अहिंसा व्रत का पालन
हिंसा का ही तो परिपोषण कहलाएगा।
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हिंसा की पीड़ा का अनुभव जिसे नहीं है
वही व्यक्ति तो खुलकर हिंसा कर पाता है
हिंसक मूढ, अहिंसा की भाषा क्या जाने
अपनी ही भाषा में व्यक्ति समझ पाता है।
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नहीं करूँगा हिंसा और न होने दूँगा
ऍसा सच्चा अहिंसार्थ व्रत लेना होगा
हिंसा के जरिए यदि हिंसा कम होती है
व्यापक अर्थ अहिंसा का अब लेना होगा।
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युद्ध
सत्य अहिंसा और शान्ति की रक्षा करने
अगर युद्ध भी होता है तो हो जाने दो
मातृभूमि की मर्यादा की रक्षा में यदि
अपना सब कुछ खोता है तो खो जाने दो
नहीं करेंगे इस पर कोई भी समझौता
महाप्रलय भी होता है तो हो जाने दो।
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डर
दुनिया में जो कौम मौत से डर जाती है
सपने में भी वह सम्मान नहीं पाती है
दीन–हीन श्रीहीन दरिद्र निकम्मी बनकर
अपमानित होकर जीते जी मर जाती है।
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शान्ति प्रस्ताव
शान्ति भंग करने की जिद जिसने ठानी है
उसे शान्ति– प्रस्ताव सरासर बेमानी है
लातों के देवता बात से नहीं मानते
भय बिन होय न प्रीति नीति हमने जानी है।
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-शास्त्री नित्यगोपाल कटारे
2 comments:
kavita achchhi lagi badhai
-subhash yadav
hoshangabad
आपके 'मुक्तक' बहुत अच्छे लगे। हांलाकि मैं बचपन से ही संस्कृत सीखना चाहता था, लेकिन ऐसा सुयोग कभी मिला नहीं। कृपया संस्कृत सीखने के लिये कोई अच्छी पुस्तक या वेब साइट बताएं। धन्यवाद।
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